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हिंदू विवाह की रस्में और मान्यताओं में सिंदूर और मंगलसूत्र का महत्व

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Hindu marriage rituals
Hindu marriage rituals

हिन्दू धर्म में विवाह को पवित्र माना जाता है | इसीलिए हिन्दू धर्म में विवाह अनेक छोटे बड़े रस्मो रिवाजो के साथ किया जाता है | ताकि इसकी पवित्रता हमेशा बनी रहे |

शादी-शुदा हिन्दू महिलाओ का माथे पर लाल सिंदूर लगाना तथा गले में मंगलसूत्र पहनना ऐसी हिन्दू रस्मे है जिन्हे पूरी दुनिया जानती है | इन रस्मो का क्या महत्व है इसके बारे में हम आज जानेंगे और साथ ही इसके कई विश्वासों और वैज्ञानिक तर्क के बारे में भी जानेंगे | ब्लॉग को पूरा पढ़िए :-

Sindoor ka mahatva in Hindi - हिन्दू धर्म में यह माना गया है और विवाह के समय में मांग में सिंदूर भरते समय भी यह बोला जाता है की लाल यानि रक्त वर्ण का सिंदूर मांग में भरे होने से सोन्दर्ये में महत्वपूर्ण वृद्धि होती है जिसके साथ आपके सुख में भी वृद्धि होती है | सिंदूर लगाने के महत्व में मोक्ष प्राप्ति का वर्णन भी मिलता है | यानि सोन्दर्ये, सुख और समृद्धि के साथ मोक्ष की प्राप्ति भी होती है |

Sindoor ka mahatva in Hindi
Sindoor ka mahatva in Hindi

हिन्दू धर्म के कई जानकारों का यह मानना है की सिंदूर को केवल शादी के प्रतिक के रूप में नहीं लगाया जाता इसके पीछे और भी कई बातों पर विश्वास किया जाता है | जो अग्रलिखित है ;-

१) कहा जाता है की अगर स्त्री के मांग के बिच सिंदूर लगा हुआ हो तो उसके पति की आयु लम्बी होती है और उसकी अकाल मृत्यु नहीं होती | 

२) विश्वास है की जो स्त्रीया सिंदूर को बालों के बिच में छुपा लेती है उसका पति भी लोक व्यवहार में छुप जाता है और वह पति प्रेम से वंचित रह जाती है |

३) एक विश्वास यह भी है की जो स्त्रीया बिच में सिन्दूर न लगा कर किनारे की तरफ सिंदूर लगती है उनका पति उनसे किनारा कर लेता है |


सिंदूर को लेकर किये जाने वाले यह सभी विश्वाश आज के समय में अन्धविश्वाश ज़्यादा लगते है | परन्तु आपको हिन्दू शोधकर्ताओं की हर बात पर विश्वास करके अंधविश्वासी नहीं बन न है | हिन्दू धर्म आपको सही कर्म और बुर्रे कर्म में भेद बता कर आपको ज्ञानी बनता है और केवल कर्म करने के लिए कहता है | कभी भी अंधविश्वास न करके अपने कर्मो को ज़िंदा रखे |

mangalsutra ka mahatva - हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुसार मंगलसूत्र का विवाहित स्त्री के लिए अधिक महत्व है | विश्वाश है की मंगलसूत्र ही विवाहित जोड़े को आपस में बांध के रखता है | विवाह के समय भी मंगलसूत्र पहनाना एक एहम रसम है | अभी भी हिन्दू के कई समाज ऐसे है जहा मंगलसूत्र के बिना शादी को समपन्न नहीं समझा जाता | विवाह के पश्चात् भी मंगलसूत्र का महत्व कम् नहीं होता है | विवाहित हिन्दू स्त्रीया कोई और गहने पहने या न पहने मगर मंगलसूत्र अवश्य पहनती है |


mangalsutra ka mahatva
mangalsutra ka mahatva
मंगलसूत्र को लेकर जिन बातों पर अधिकतर विश्वास किया जाता है उसे इंकार नहीं किया जा सकता अर्थात विश्वाश किया जा सकता है | निचे पूरा कथन पढ़े :-

हिन्दू धर्म के कुछ प्रसिद्ध साधुओ ने यह बात कही है की मंगलसूत्र का अर्थ अधिकतर लोगो के लिए शादी-शुदा होने की निशानी है और इसे फैशन के रूप में प्रयोग किया जाने लगा है | परन्तु पहले यह सूत या रेशम से त्यार किया गया एक पवित्रृ धागा होता था और इसे हर साल बदला जाता था | यह धागा खास ढंग से त्यार किया जाता था | यह अपनी उर्जाओ को लाभदायक तरीके से उपयोग करने का एक कारगर तरीका था | इसे इस तरह से त्यार किया जाता था की जब इसे बंधा जाता था तब दो लोगो का केवल शारीरिक मिलन न होकर दोनों की उर्जाओ का भी मिलन होता था | परन्तु आज यह रस्म खोकली हो गयी है | जिस कारण शादी के बाद भी इमोशनल इन्सेक्युरिटीज़ ख़त्म नहीं होती |

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